डिग्री की चमक या कौशल का अभाव? क्यों 40% ग्रेजुएट्स आज भी बेरोजगार हैं: एक कड़वी सच्चाई
नई दिल्ली: हर साल भारत में लाखों छात्र अपनी डिग्री पूरी कर कॉलेज से बाहर निकलते हैं, लेकिन 'द ऑनेस्ट पोस्ट' की पड़ताल दिखाती है कि डिग्री और असल मार्केट स्किल्स के बीच एक गहरी खाई बन चुकी है। नामी कॉलेजों के विज्ञापन 100% प्लेसमेंट का दावा तो करते हैं, लेकिन असलियत इससे कोसों दूर है।
कोचिंग माफिया और छात्रों का दबाव
शिक्षा अब एक सेवा से ज्यादा एक व्यापार बनती जा रही है। हमारी टीम ने पाया कि कई निजी संस्थान छात्रों को केवल किताबी ज्ञान दे रहे हैं, जबकि आज की टेक कंपनियाँ प्रॉब्लम-सॉल्विंग और प्रैक्टिकल अनुभव की मांग करती हैं। बिना किसी जांच-परख के लिए गए एडमिशन अंत में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ साबित हो रहे हैं।
- 80% से ज्यादा इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स इंडस्ट्री के मानकों पर फिट नहीं बैठते।
- प्रैक्टिकल लैब और इंटर्नशिप के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
- करियर काउंसलिंग के नाम पर छात्रों को महंगे और गैर-जरूरी कोर्सेज बेचे जा रहे हैं।
अभिभावकों को यह समझने की जरूरत है कि केवल डिग्री दिला देना ही काफी नहीं है। जब तक शिक्षा प्रणाली में सुधार नहीं होगा और स्किल्स पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक यह बेरोजगारी का आंकड़ा कम होना मुश्किल है।
सावधान रहें!
किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले उनके पुराने छात्रों से मिलें और विज्ञापन के दावों की 'द ऑनेस्ट पोस्ट' की तरह खुद भी जांच करें।
सत्य का साथ दें, जागरूक भारत का हिस्सा बनें।
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